उरई और चित्रकूट: रेलवे भर्ती में रिश्वतखोरी मामले में सीबीआइ ने तीन कर्मियों को गिरफ्तार

उरई और चित्रकूट: रेलवे भर्ती में रिश्वतखोरी मामले में सीबीआइ ने तीन कर्मियों को गिरफ्तार

CBI arrests three railway officials in bribery case

CBI arrests three railway officials in bribery case

  1. चित्रकूट व जालौन में फोन पर कांफ्रेंस के माध्यम से सीबीआइ टीम ने बुना था कार्रवाई का जाल

  2. रात 12:30 बजे भगवान सिंह पाल ने जैसे ही रिश्वत के 20 हजार रुपये लिए तो टीम ने दबोचा

उरई। रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक यानी ओएचई लाइन ठीक करने में लगाए जाने वाले ठेका कर्मियों की भर्ती के मामले में सीबीआइ लखनऊ की टीम ने तीन रेलवे कर्मियों को पकड़ा है। एक को उरई से गिरफ्तार किया, जबकि दो चित्रकूट से उठाए गए हैं। उरई में पकड़े गए रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन) भगवान सिंह पाल 2018 से यहां तैनात हैं। बाकी दोनों डिवीजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन) शांतनु यादव व प्रकाश कुशवाहा हैं।

शांतनु यादव दिसंबर 25 में ही यहां तैनात हुए हैं जबकि प्रकाश कुशवाहा वर्ष 2013 से तैनात हैं। आरोप है कि प्राइवेट ठेका कर्मियों की नियुक्ति व काम देने के लिए रुपये की मांग कर रहे थे। मैन पावर कंपनी के मालिक द्वारा की गई शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई। बीएल पाल को रंगे हाथों 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। सीबीआइ टीम तीनों को पूछताछ के लिए लखनऊ ले गई है।
रेलवे के ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (विद्युत कर्षण विभाग) में प्राइवेट तौर पर कर्मचारियों की भर्ती होनी है। इसके लिए भगत इंजीनियरिंग कंपनी को ठेका दिया गया है। जानकारी मिली है कि इसके लिए एसएसइ (टीआरडी) भगवान सिंह पाल ने 50 हजार रुपये और हर माह अलग से रुपये देने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर भगत इंजीनियरिंग कंपनी के प्रोपराइटर सिद्धार्थ गौतम ने कई बार उनसे अनुरोध किया कि कर्मचारियों को सीधे रखा जाए। इस पर वह तैयार नहीं थे। बात न बनने पर सिद्धार्थ गौतम ने इसकी शिकायत सीबीआइ से कर दी। टीम ने इसके लिए रिश्वतखोरों को पकड़ने के लिए जाल बुना। टीम यहां पर सर्किट हाउस पहुंची।

पूरी जानकारी की तो पता चला कि भगवान सिंह पाल तो यहीं कार्यालय में है जबकि डीइइ टीआरडी शांतनु यादव और टेक्निकल इंचार्ज प्रकाश कुशवाहा चित्रकूट में हैं। टीम ने सिद्धार्थ गौतम को 20 हजार रुपये देकर भगवान सिंह पाल से बात कराई। सिद्धार्थ गौतम ने जैसे ही रात करीब साढ़े 12 बजे कार्यालय पहुंचकर रुपये दिए तो सीबीआइ टीम के तीन सदस्यों ने भगवान सिंह पाल को धर-दबोचा।

इसके बाद भगवान सिंह पाल की शांतनु यादव से फोन पर बात कराई और उन्होंने कहा कि 20 हजार रुपये मिल गए हैं, बाकी 30 हजार रुपये बाद में देने को कह रहे थे। इस पर उन्होंने इसे ठीक बताया। इस दौरान सीबीआइ ने फोन को कान्फ्रेंस पर लगा रखा था। जैसे ही डीइइ (टीआरडी) शांतनु यादव ने सही बताया। उसके बाद उनके साथ ही टेक्निकल इंचार्ज प्रकाश कुशवाहा को भी दूसरी टीम ने चित्रकूट में पकड़ लिया।

बताया गया है कि यह लोग रुपये लेने के बाद भी प्राइवेट कर्मियों के इंटरव्यू में भी और रुपये की मांग कर रहे थे। इंटरव्यू का कोई प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में सिद्धार्थ गौतम ने परेशान होकर इसकी शिकायत की थी। डीइइ शांतनु यादव और प्रकाश कुशवाहा भी इस इंटरव्यू में शामिल होने वाले थे। यही कारण है कि उनको भी पकड़ा गया है। सीबीआइ टीम सभी को लखनऊ लेकर गई है।
कर्षण विभाग के दूसरे सीनियर सेक्शन इंजीनियर (टीआरडी) गौतम शर्मा को टीम ने बाद में सर्किट हाउस बुलाया। उसने जानकारी मांगी तो उन्होंने कुछ भी मालूमात होने से इंकार किया। उन्होंने बताया कि रात करीब दो बजे सर्किट हाउस बुलाया गया है। वहां पर भगवान सिंह पाल पहले से मौजूद थे। रिश्वत लेने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। सीबीआइ टीम के सदस्यों ने अन्य जानकारी देने से मना कर दिया और अपने साथ ले गई।